Antarvasana-hindi-kahani Access
सुबह हुई। उसने कैनवस को फिर से अलमारी के पीछे छुपा दिया। लेकिन इस बार उसने डायरी में कुछ लिखा:
अंत में वह कैनवस छुपा तो देती है, पर इस बार वह जानती है कि उसकी वासना मरती नहीं — वह ज़िंदा है। और यही ज्ञान उसे एक नई ताकत देता है। antarvasana-hindi-kahani
"आज मैंने अपनी अंतर्वासना को नाम दिया — वह मेरी पेंटिंग है। वह ज़िंदा है।" 'अंतर्वासना' शब्द सुनते ही अक्सर मन में कोई गुप्त, दबी हुई इच्छा आती है — जिसे समाज, परिवार या परिस्थितियाँ बाहर आने नहीं देती। उपरोक्त कहानी 'अंतर्वासना' के इसी मूल भाव को उकेरती है। antarvasana-hindi-kahani
आलोक उठा, तैयार हुआ, ऑफिस चला गया। बच्चे स्कूल गए। मीरा ने खाना बनाया, कपड़े सुखाए, फर्श पोंछा। शाम को सब लौटे। खाना खाया। टीवी देखा। सब सो गए। antarvasana-hindi-kahani
रात के दो बज रहे थे। उसने ड्राइंग रूम की लाइट जलाई। अलमारी के पीछे से उसने एक कैनवस निकाला — जो उसने तीन साल पहले खरीदा था, पर कभी नहीं खोला। ब्रश निकाले। रंग निकाले। पानी का गिलास रखा।
जब वह पेड़ बनाती है जिसकी जड़ें आसमान की तरफ उठ रही हैं, तो यह एक प्रतीक है — वह पेड़ मीरा खुद है, जो ज़मीन की कैद से मुक्त होना चाहती है, आकाश की ओर बढ़ना चाहती है। वह रोती है, लेकिन दर्द से नहीं — राहत से। क्योंकि दबी हुई वासना को बाहर निकालना ही मुक्ति है।